एक दौर था कि इन खड़ाऊंओं की लगातार खटखट की आवाज हमारी जिंदगियों में वैसे ही शामिल थी जैसे बाबा कि यादें जो ये खड़ाऊं पहनते थे.
2.
सीमेन्ट के बोरें पड़े हैं, सारी फ़र्श धूल-धूसरित हैं और कामगार व मिस्त्री लोगों के काम करने की खटखट की आवाज से परेशान हो जाओगे।” “मुझे कोई परेशानी नहीं होगी।